चीन में ग्लोबल टाइम्स को वहां की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का मुखपत्र माना जाता है ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के डासू में 14 जुलाई को हुए बस हमले के पीछे बलूचिस्तान चरमपंथी या पाकिस्तानी तालिबान का हाथ हो सकता है

ग्लोबल टाइम्स ने जानकारों के हवाले से यह बात कही है।

ग्लोबल टाइम्स ने सुरक्षा और आतंकवाद निरोधी कार्य के विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि बलूचिस्तान चरमपंथी और पाकिस्तानी तालिबान इस हमले की साज़िश रचने वाले हो सकते हैं। अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, ''अभी तक किसी ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है तो संभव ये भी है कि किसी तीसरे देश की सेना इस साज़िश के पीछे हो।''

डासू में एक बस में सवार 13 लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें 9 चीनी नागरिक भी शामिल थे। चीन ने पहले ही इस हमले को चरमपंथी हमला बताया था और बाद में पाकिस्तान ने भी विस्फोटकों के साक्ष्य होने की बात कही और माना की यह एक चरमपंथी हमला हो सकता है।

चीन के प्रधानमंत्री संग हुई बातचीत के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने चीन की सरकार और इस हमले में अपनों को खोने वाले पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना ज़ाहिर की।

इमरान ख़ान ने उन्हें यह भी बताया कि जांच अभी किस लेवल तक पहुंची है और अब तक क्या कुछ मालूम हो सका है।

चीन के प्रधानमंत्री ली केचियांग ने ज़ोर देते हुए कहा कि चीन की सरकार के विदेशों में बसे और काम करने गए उसके नागरिक और संगठन बेहद महत्वपूर्ण हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने शिन्हुआ यूनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रैटिजी इंस्टिट्यूट में रिसर्च डिपार्टमेंट के निदेशक कियान फेंग के हवाले से लिखा है कि बलूचिस्तान चरमपंथी और पाकिस्तानी तालिबानी इस हमले के पीछे हो सकते हैं।

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''ख़ैबर पख़्तूनख़्वा पाकिस्तान का सबसे अधिक अशांत रहने वाला इलाक़ा है। इसका एक प्रमुख कारण यह भी है कि इसकी एक सीमा अफ़ग़ानिस्तान से लगती है और यह इलाक़ा पाकिस्तानी तालिबान का घर है।''

''हालांकि अबी तक किसी भी संगठन या समूह ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है इसलिए यह तय तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि हमला पाकिस्तान तालिबान ने ही किया। लेकिन जिस तरह के हमले वे पहले करते रहे हैं यह उससे काफ़ी मिलता-जुलता था।''

ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, कियान फेंग अपनी बात के समर्थन में कहते हैं कि पाकिस्तानी तालिबान का रिकॉर्ड रहा है जिसमें उसने पाकिस्तानी सरकार, नागरिकों और सेना पर हमला किया है। बीते कुछ सालों में इस समूह ने पाकिस्तान में चीनी परियोजनाओं को भी निशाना बनाया हैऔर चीनी पर्यटकों, व्यापारियों पर हमले किए हैं।

वो कहते हैं पाकिस्तानी तालिबान अच्छे से जानता है कि पाकिस्तान के लिए चीन से संबंध कितने महत्वपूर्ण हैं और उसका मक़सद ऐसे हमले करके इस रिश्ते को नुकसान पहुंचाना है।

कियान मानते हैं कि चरमपंथ के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की सरकार ने प्रयास किये हैं और इससे पाकिस्तानी तालिबान की गतिविधियां भी पहले से कम हुई हैं लेकिन हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान में पैदा हुए हालात से वे दोबारा सक्रिय हो रहे हैं।

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