सुप्रीम कोर्ट ने काँवड़ यात्रा पर कहा, जीने के अधिकार से बड़ा कुछ भी नहीं
काँवड़ यात्रा पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में आज दायर किया हलफ़नामा जिसमें उसने कहा है कि कोरोना के खतरे को देखते हुए काँवड़ियों को हरिद्वार नहीं जाने देना चाहिए।
हालाँकि, साथ ही केंद्र ने एक सुझाव और भी दिया और कहा -
"धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों को टैंकरों के माध्यम
से 'गंगा जल' उपलब्ध कराने
चाहिए। "
केंद्र ने कहा- "टैंकर चिन्हित/निर्धारित स्थानों पर
उपलब्ध हों ताकि आस-पास के भक्त 'गंगा जल' को इकट्ठा कर सकें और अपने नजदीकी शिव मंदिरों में 'अभिषेक' कर सकें। इस
दौरान राज्य सरकारों को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोरोना नियमों का पालन किया जाए।"
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों उत्तर प्रदेश सरकार के कोरोना
महामारी के बीच काँवड़ यात्रा की अनुमति देने के फ़ैसले पर नोटिस जारी करते हुए
उससे जवाब माँगा था। उसने साथ ही केंद्र को भी तलब किया था।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालत से कहा कि उनसे काँवड़ यात्रा
को "प्रतीकात्मक" तौर पर जारी रखने का फ़ैसला किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसपर कहा उसे आख़िरी मौक़ा देते हुए कहा
है कि वो अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार करने अन्यथा अदालत सोमवार को इस बारे में आदेश
जारी कर देगी।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अपनी टिप्पणी में कहा कि
जीने के अधिकार से बड़ा कुछ भी नहीं है और हर तरह की भावनाएँ संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए इस
मौलिक अधिकार के बाद ही आती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों इस मामले का स्वतः संज्ञान
लिया था। न्यायाधीश रोहिंटन एफ़ नरीमन की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि इस
बारे में शुक्रवार 16 जुलाई को सुनवाई होगी।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने मंगलवार को कोविड दिशानिर्देशों का
पालन करते हुए राज्य में 25 जुलाई से काँवड़ यात्रा निकालने की अनुमति दे दी थी।
इसके कुछ ही घंटे बाद उत्तराखंड सरकार ने कोरोना की तीसरी
लहर की आशंका को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी काँवड़ यात्रा को रद्द कर दिया।
इस वर्ष उत्तराखंड सरकार के महाकुंभ को जारी रखने के फ़ैसले
को लेकर कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा था जिसके बाद कोरोना की दूसरी लहर से देश
के कई राज्यों में हाहाकार मच गया था।
Leave A Comment
LIVE अपडेट
राज्य
Stay Connected
Get Newsletter
Subscribe to our newsletter to get latest news, popular news and exclusive updates.





0 Comments
No Comments